हनुमानगढ़। अखिल भारतीय किसान सभा ने एक किसान से 40 क्विंटल सरसों-चना की खरीद करने की सीमा तय करने का विरोध किया है। इसके खिलाफ किसान सभा ने आंदोलन की चेतावनी दी है। बुधवार को जंक्शन धानमंडी स्थित विश्राम गृह में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में किसान सभा के सुरेन्द्र शर्मा ने बताया कि सरकार ने कहा था कि पानी की कमी रहेगी। इसके चलते अधिकतर किसानों ने गेहूं की जगह सरसों की बिजाई की क्योंकि गेहूं को छह-सात बारी पानी जबकि सरसों को मात्र दो बारी पानी की आवश्यकता होती है। अब प्रति बीघा 7 से 8 क्विंटल सरसों का उत्पादन हो रहा है। सरकार की ओर से एक किसान से 40 क्विंटल सरसों-चना की खरीद करने की सीमा तय कर दी गई है, लेकिन एक किसान से कितनी खरीद की जानी चाहिए, यह तय नहीं होना चाहिए। किसान से उसकी पूरी फसल की खरीद एमएसपी पर हो, लेकिन सरकार की मंशा किसानों की सरसों खरीदने की नहीं है। व्यापारियों को लाभ पहुंचाया जा रहा है। कुछ दिन किसानों की गिरदावरी से ही व्यापारी सरसों बेचकर सरकारी रेट प्राप्त करेंगे। किसान घाटे में अपनी फसल व्यापारी को बेचकर जाएगा जबकि व्यापारियों को फायदा होगा। इसके खिलाफ आंदोलन किया जाएगा।
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