यह महिला 7 महीने से अपना दिल अपने बैग में लेकर चलती है, देखिए तस्वीरें

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लंदन: ये महिला वाकिय सीखा रही है जिंदगी को सही तरीके से जीने का मतलब, इस महिला के पास दिल नहीं है। 7 महीने से ज्यादा समय से आर्टिफिशियल दिल के सहारे अपनी जिंदगी का हर लम्हा जी रही हैं। ये महिला हैं सेलवा हुसैन। अपनी पीठ पर हार्ट लेकर चलने वाली वह ब्रिटेन की पहली महिला हैं।

39 साल की और दो बच्चों की मां सेलवा का हार्ट 7 महीने पहले फेल हो गया। डॉक्टरों ने उनका नेचुरल हार्ट निकालकर कृत्रिम हार्ट लगाया। इसकी मेन यूनिट पीठ पर बैग में रहती है। यूनिट में 2 बैटरी, एक मोटर और एक पंप हैं। ये ट्यूब के द्वारा हवा कृत्रिम हार्ट में लगे दो बलून्स में भेजते हैं।

ये नेचुरल हार्ट के चैंबर्स की तरह काम करते हैं। इससे सेलवा के शरीर में रक्त का संचार हो पाता है और दिल धड़कता रहता है। 7 किलो वजनी बैग में स्टैंडबाय में सेकंड यूनिट भी है। पहली बंद हुई तो दूसरी को 90 सेकंड में कनेक्ट करना जरूरी है। नहीं तो मौत हो जाएगी। इस कारण हर वक्त उनके पति या कोई सहायक साथ होते हैं। इस पूरी डिवाइस की कीमत 74 लाख रुपए है।

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ऐसे काम करता है बैकपैक हार्ट-

– सर्जरी के बाद कृत्रिम पंप चैंबर को नेचुरल हार्ट की जगह फिट किया गया। इसमें दो बलून्स लगे हैं, जो सीने में हवा भरते हैं।
– पीठ पर लगी यूनिट से पाइप के जरिए ये हवा बलून्स में जाती है। इससे शरीर को खून पहुंचता है और दिल धड़कता रहता है।
– दिल की तरह पंप चैंबर और सेंसर बॉक्स लगा है।
– दो रबर ट्यूब को नाभि के जरिए सीने तक पहुंचाया गया।

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इस तरह सेल्वा को मिला आर्टिफिशल हार्ट  
सेल्वा को 6 महीने पहले सांस लेने में काफी दिक्कत हुई। परेशानी इतनी बढ़ कि वो तुरंत डॉक्टर के पास पहुंची। डॉक्टर ने उन्हें सीरियस हार्ट फेलियर की दिक्कत बताई और उन्हें विश्व प्रसिद्ध ‘Harefield’ अस्पताल में रेफर किया गया। यहां डॉक्टरों ने उन्हें जीवित रखने के लिए काफी मशक्कत की। डॉक्टरों ने बताया कि सेल्वा ही हालत इतनी नाजुक थी कि न उन्हें लाइफ सपोर्ट के जरिए जीवित रखा जा सकता था और न ही उनकी हार्ट ट्रांसप्लांट सर्जरी की जा सकती थी। इसलिए डॉक्टरों ने उन्हें एक ऐसा सिस्टम लगाया जो शरीर के बाहर रहता है, लेकिन उसका कनेक्शन शरीर के भीतर इस तरह किया जाता है कि वो बिलकुल हार्ट की तरह ही शरीर में खून पंप करता है।

सेल्वा का पांच साल का एक बेटा है और 18 महीने एक बेटी है। सेल्वा कहती हैं, ‘मैं ये सर्जरी होने से पहले और उसके बाद काफी बीमार थी। मुझे ठीक होने में लंबा वक्त लगा।’ बता दें सेल्वा से पहले यूके में एक और इंसान को ये आर्टिफिशियल हार्ट 2011 में लगाया गया था।

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